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स्थायी प्रवृत्तियाँ

प्रेमपुरी आश्रम मे मूल आधार एवं प्रमुख ध्येय के स्वरूप में दो स्थायी प्रवृत्तियाँ  दैनंदिन स्तर पर निरंतर चलती है. ये है- प्रातः सत्संग प्रवचन तथा स्वाध्याय

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आश्रम के स्थापना वर्ष १९७५ से ऐसा एक भी दिन नही है कि सुरज उगा हो और प्रेमपुरी में सत्संग प्रवचन न हुआ हो. यह परंपरा आश्रम का गौरव है.
यह् दो प्रवृत्तियाँ आश्रम के आधार स्तंभ एवं पूर्ण परिचाय है.
प्रातः सत्संग प्रवचन तथा स्वाध्याय नित्य नियमित स्थायी रूप से चले, यह ब्रह्मलीन स्वामी श्री प्रेमपुरीजी महाराज का शुभ संकल्प साकार करने हेतु उनके अनुयायी भक्तों ने प्रेमपुरीImage अध्यात्म विद्या भवन की स्थापना की.


सनातन धर्मशास्त्र भारतीय अध्यात्मिक जीवन का तंतूपट है. इस शास्त्र के अर्थ और मर्म की पहचान कराना और प्रेम, भक्ति, निष्काम सेवा जो हमारे भारतवर्ष के असंख्य ऋषिमुनी, संत एवं विद्वानों की धरोहर है उसे आगे चलाना यही इन दो प्रवृत्तियों का मुख्य उद्देश्य है.

अधिक जानकारी  :-  प्रातः सत्संग प्रवचन तथा स्वाध्याय

 

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