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सांप्रत कालीन प्रवचन शृंखला

यहाँ आप प्रातः सत्संग प्रवचन के ध्वनिमुद्रण के कुछ अंश निःशुल्क सुन सकते है.
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विषय : Pravachankaar

"कठोपनिषद्"

[१ से सितंबर २०१]


प्रवचनकार
:

प. पू. स्वामी श्री मोहनचैतन्यजी महाराज (बनारस) 



विषय के संदर्भ में :

कठॉपनिषद कृष्ण यजुर्वे की कठ शाखान्तर्गत सूर्यपुत्र यम तथा वाजश्रवपौत्र नचिकेता इन दोनॉं के अत्याधिक मार्मिक संवाद के रूप में प्रस्तुत है.
नचिकेता ने यमराज कॉ तीन प्रश्न किये है और यमराज ने उनका विस्तृत उत्तर दिये है.
प्रथम संवाद में स्वर्गलॉक प्रदान करनेवाली अग्नि विद्या का प्रकाशन हुवा है.
अनंतलॉकाप्तिमथॉ प्रतिष्ठां विध्दि त्वमेतं निहितं गुहायाम्.
द्वितीय संवाद में मृत्यूंपरांत जीव की गती में उसके कर्म और संस्कार ही अन्य शरिरॉं की प्राप्ती में कारण है यह स्पष्ट किया गया है.
यॉनिमन्ये प्रपध्यंते ---------- यथाकर्म यथाश्रुतम्
तिसरे संवाद में देशकालवस्तूगत परिच्छिन्नता से रहित लॉकातीत तत्व जिस कॉ प्रणवचिंतन से जान कर जीव इस दुःखमय संसार से मुक्ति पाकर ब्रह्मरूप प्राप्त करता है.
ब्रह्मप्राप्तॉ विरजॉ s विमृत्यु।

ऊँ शान्तिः! शान्तिः! शान्तिः! शान्तिः!



 

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